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आरोपियों को दण्डित करना कोर्ट का पवित्र कर्तव्य- अंजली पारे* ```कोरोना संक्रमण काल में अपील में आया निर्णय - 4 आरोपी पंहुचे जेल``
June 19, 2020 • महेश मावले (सम्पादक) 9407505550 • ग्वालियर संभाग

` राजगढ। राजगढ न्यायालय में पदस्थ माननीय तृतीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमति अंजली पारे ने क्रिमिनल अपील क्रमांक 1401302/2016 थाना कालीपीठ के अपराध क्रमांक 291/2016 धारा 294, 186, 353, 332, 506, 34 भादवि में आरोपीगण लालसिंह पिता श्रीलाल तंवर उम्र 61 वर्ष, रोडीबाई पति बीरमसिंह तंवर उम्र 24 वर्ष, रतनबाई पिता लालसिंह तंवर, उम्र 26 साल, कंचीबाई पति लालसिंह तंवर उम्र 58 साल सर्व निवासी ग्राम फूटातालाब थाना कालीपीठ जिला राजगढ को एक लोक सेवक के अपने कर्तव्यों के निर्वहन के समय मारपीट और झूमांझटकी करने तथा सरकारी दस्तावेजों को क्षतिग्रसत करने के आरोप में 1 वर्ष के सश्रम कारावास से दण्डित किया है। घटना का विवरण इस प्रकार है कि दिनांक 25 दिसम्बर 2016 को प्रकरण के आरोपीगण लालसिंह पिता श्रीलाल तंवर उम्र 61 वर्ष, रोडीबाई पति बीरमसिंह तंवर उम्र 24 वर्ष, रतनबाई पिता लालसिंह तंवर, उम्र 26 साल, कंचीबाई पति लालसिंह तंवर उम्र 58 साल सर्व निवासी ग्राम फूटातालाब थाना कालीपीठ जिला राजगढ ने एक राय होकर जल संसाधन विभाग के इंजीनियर अशोक वीरपाल सिंह व शक्ति सिंह के साथ उनके द्वारा किये जा रहे सर्वे के दौरान मारपीट कर शासकीय दस्तावेज को क्षति पहुंचाकर सहकारी काम में बाधा उपस्थित की थी । इस घटना की रिपोर्ट उप यंत्री अशोक ने थाना कालीपीठ में दर्ज करायी थी । प्रकरण की जानकारी देते हुए जिला अभियोजन अधिकारी ने बताया कि निर्माणाधीन सिंचाई तालाब के अंतर्गत संपत्तियों का मौके सत्यापन कार्य हेतु ग्राम फूटातालाब गया था, तभी सर्वे नंबर 315 पर आरोपीगण लालसिंह, व उसकी लड़कियां रतनबाई व रोडीबाई, उसकी पत्नि कंचीबाई बोले कि सर्वे नंबर 315 के पक्के कुंए को हमारे सर्वे नंबर 310 में बताया जाकर मुआबजा उन्हें दिलाया जावे। जबकि मौके पर कुआं सर्वे नंबर 315 में मौजूद है। फरियादी द्वारा उनको बताया कि वह ऐसा गलत नहीं करेगा। इसी बात पर अभियुक्तगण ने फरियादी अशोक को गालियां दी और उसके साथ झूंमाझटकी, मारपीट व शासकीय दस्तावेज खसरा व बी 1 फाड़ दिये एवं उसे जान से मारने की धमकी दी । फरियादी की उक्त रिपोर्ट पर थाना कालीपीठ में अपराध पंजीबद्ध किया गया। पुलिस के द्वारा प्रकरण में विवेचना की जाकर चालान न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। अपराध का विचारण करते हुये जिला न्यायालय में पूर्व में पदस्थ रहे न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी श्री साजिद मोहम्मद ने दिनांक 15-10-2019 को दिये अपने निर्णय में सभी आरोपी गण को शासकीय कार्य में बाधा डालने के अपराध में 2 साल सश्रम कारावास तथा सहकारी कर्मचारी के साथ मारपीट झूमाझपटी करने के अपराध में 1 साल कारावास की सजा दी थी । इस आदेश के विरूद्ध अभियुक्तगणों ने सत्र न्यायालय में इस आधार पर अपील की थी किसी भी गवाह के कथन से यह प्रमाणित नहीं हो रहा है कि घटना के समय उपयंत्री और उनकी टीम शासकीय कार्य कर रही थी। यह भी प्रमाणित नहीं हुआ कि आरोपीगण ने ही उपयंत्री और उनकी टीम के साथ मारपीट की थी। माननीय तृतीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमति अंजली पारेे ने अपील का विचारण करते हुए दोनों पक्षों की दलीलें सुनी और यह पाया कि घटना दिनांक को जल संसाधन विभाग की सर्वे टीम मौके पर पंहुची थी और उनके साथ आरोपीगण लालसिंह, रतनबाई, रोडीबाई, कंचीबाई ने एक राय होकर शासकीय कार्य में बाधा डालते हुए सर्वे के खसरा की नकल फाड़ी थी और झूमाझटकी की थीं । न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को सही पाते हुए निर्णय की पुष्टि की है और निचले न्यायालय द्वारा दी गयी सजा को यथावत रखते हुए आरोपीगणों को 1 साल के सश्रम कारावास से दण्डित कर जिला जेल राजगढ भेज दिया है। आरोपीगण द्वारा जुर्माने की राशि पूर्व में ही न्यायालय में जमा करा दी गयी थी। इस प्रकरण मेें शासन की ओर से पैरवी जिला लोक अभियेाजन अधिकारी श्री आलोक श्रीवास्तव द्वारा की गई है। आज दिनांक को निर्णय पारित करते हुए विद्वान न्यायाधीश सुश्री अंजली पारे ने टिप्पणी की है कि *‘‘दण्ड की मात्रा इतनी अल्प नही होनी चाहिए कि वह समाज की आत्मा को आघात पंहुचाए। न्यायालय का यह पवित्र कर्तव्य है कि वह दण्ड देते समय न्याय और समाज के मध्य उचित संतुलन स्थापित करें।‘‘*