ALL ग्वालियर संभाग राष्ट्रीय बिग ब्रेकिंग भोपाल संभाग उज्जैन संभाग जबलपुर संभाग सागर संभाग नर्मदापुरम संभाग इन्दौर संभाग CRIME NEWS
एक आरोपी ने फिर बताया कोरोना संक्रमण बहाना - न्यायालय से मांगी जमानत
June 1, 2020 • महेश मावले (सम्पादक) 9407505550 • ग्वालियर संभाग

आरोपी चाचा ने अपने भाई की अबोध बालिका से किया था कुकृत्य राजगढ। राजगढ न्यायालय में पदस्थ माननीय विशेष न्यायाधीश पाॅक्सो एक्ट श्रीमति अंजली पारे ने अपने न्यायालय के एक प्रकरण में ढाई वर्षीय बालिका से कुकृत्य करने के आरोपी गोपाल सोनी की जमानत खारिज कर दी है। घटना का विवरण इस प्रकार है कि फरियादी पीडिता की मां ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि उसके पति के छोटे भाई ने उसकी ढाई वर्षीय बालिका की योनि में उंगली डालकर अपराध किया है जिसके कारण उसकी लड़की बता रही है कि उसे शूशू में चोट आई थी, ताता हो गई थी, मुझे ताता मेरे चाचा ने की थी। उक्त प्रकरण की विवेचना के दौरान आरोपी गोपाल सोनी को गिरफ्तार कर अभिरक्षा में लिया गया था और आरोपी करीब तीन माह से न्यायिक अभिरक्षा में जिला जेल राजगढ में निरूद्ध है। आरोपी गोपाल ने जिला जेल राजगढ में कोरोना संक्रमण फैलने की आशंका और स्वास्थ्य को खतरा होने के आधार पर अपना जमानत आवेदन पत्र प्रस्तुत कर जमानत की मांग की थी। अभियोजन की ओर से डीपीओ श्री आलोक श्रीवास्तव द्वारा तर्क किये गये कि आरोपी गोपाल सोनी ने पीडित ढाई वर्षीय अबोध बालिका के चाचा रहते हुए उसके साथ घटना घटित की है। अभियुक्त गोपाल सोनी का अपराध मृत्युदण्ड अथवा शेष प्राकृत जीवनकाल तक के कारावास से दण्डनीय अपराध है, जिसमें यदि आरोपी को जमानत पर रिहा किया जाता है तो निश्चित ही न्याय के विपरीत प्रभाव पड़ेगा और समाज में भी एक गलत मैसेज प्रसारित होगा। इस कारण आरोपी को जमानत पर रिहा न किया जावे। इस प्रकरण की सुनवाई करते हुये माननीय न्यायालय के द्वारा पाॅक्सो एक्ट तथा दण्ड विधि संशोधन अधिनियम की धारा 439(5) दण्ड प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के तहत पीडित बालिका और उसके माता-पिता को आरोपी की जमानत के संबंध में सुना गया। पीडित बालिका ने माननीय न्यायालय को दिये अपने कथन में अपने साथ घटित हुई सम्पूर्ण घटना का विवरण बताया है। अभियोजन के तर्कों और पीडित बालिका के द्वारा घटना का पूर्ण विवरण दर्ज करावाये जाने से सहमत होते हुये माननीय न्यायालय ने आरोपी की जमानत खारिज करते हुये टिप्पणी की है कि ‘‘अभियुक्त द्वारा कारित अपराध न केवल विधि की दृष्टि में अपराध है अपितु सामाजिक एवं नैतिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत क्रूरतापूर्ण एवं घृणित कृत्य है।