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शाही जामा मस्जिद बुरहानपुर के इमाम ने कोरोना को लेकर एक बार फिर आगाह किया, कहा: डॉक्टर का फैसला क़ाज़ी के फैसले से ऊपर होता है
July 8, 2020 • महेश मावले (सम्पादक) 9407505550 • इन्दौर संभाग

बुरहानपुर(मेहलक़ा अंसारी) शाही जामा मस्जिद बुरहानपुर के पेश इमाम हजरत सय्यद इकरामुल्लाह बुखारी ने लाक डाउन की अवधि में एवं कई अन्य अवसरों पर अपने अमूल्य विचारों से बुरहानपुर वासियों को लाभान्वित किया है। 31 जुलाई 2022 तक लॉकडाउन है, लेकिन जिला प्रशासन द्वारा अनेक सुविधाओं के साथ जनजीवन पूर्व अनुसार बहाल किए जाने के प्रयास कलेक्टर बुरहानपुर श्री प्रवीण सिंह द्वारा किए जा रहे हैं। लेकिन बुरहानपुर के देहात, जो महाराष्ट्र की सीमाओं से सटे हुए हैं, में कोरोना के मरीजों की संख्या में वृद्धि हो रही है। यह स्थिति चिंतनीय है एवं हमारे लिए ठीक नहीं है। इन परिस्थितियों से विचलित होकर शाही जामा मस्जिद बुरहानपुर के पेश इमाम हजरत सैयद इकराम उल्लाह बुखारी ने शाही जामा मस्जिद बुरहानपुर की सोशल साइट पर उर्दू और हिंदी में अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त किया है। उन्होंने चंद सवाल सब से किया है और पूछा है कि क्या करोना खत्म हो गया है? क्या हमको एहतियात नहीं करना है ? या किसी ने हमको संतुष्ट कर दिया ? अगर हम उस रोग की चपेट में नहीं आए तो क्या रोग मौजूद नहीं ? या हमको वह रोग नहीं लग सकता। ऐसे बहुत से सवाल है। उन्होंने कहा कि एक सामान्य कहावत है " जब दुश्मन छुपा हो तो तुम भी छुप जाओ " ऐसे अवसरों पर इस्लाम क्या कहता है ? हमारे नबी मोहम्मद साहब ने हमें क्या आदेश दिया है ? सारी दुनिया और उसके हालात एक तरफ और हमारे नबी पैगंबर मोहम्मद साहब का हुक्म एक तरफ। पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब SAW के आदेश की उपेक्षा करके हम कितनी ही इबादत कर ले उसका क्या ? इस पर हमको मंथन करना होगा। अपनी बात को समाप्त करने के पूर्व उन्होंने लिखा है कि इस्लाम में डॉक्टर का फैसला क़ाज़ी के फैसले से ऊपर होता है। उनके भावनाओं के संदर्भ में यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि हम हमारे मोहल्ले, गलियों और बाजारों में बेखौफ होकर घूम रहे हैं। जबकि वर्तमान परिस्थितियों में हमको और ज्यादा सतर्क रहने की आवश्यकता है। शाही जामा मस्जिद बुरहानपुर के इमाम हजरत सय्यद इकराम उल्ला बुखारी के द्वारा की गई आगाही (चेतावनी) को हम सीरियस लेकर उसपर चिंतन और मनन करने का साथ अमल करने की जरूरत है।